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पटना एयरपोर्ट का रनवे होगा लंबा, केंद्र ने बनाई 20 सदस्यीय समिति

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Patna Airport News: पटना एयरपोर्ट के रनवे विस्तार को लेकर केंद्र सरकार ने 20 सदस्यीय समिति गठित की है। जमीन अधिग्रहण, चिड़ियाघर की जमीन और लैंडिंग से जुड़ी बाधाओं पर अप्रैल में पहली बैठक हो सकती है।

पटना: बिहार की राजधानी पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है।

पटना एयरपोर्ट के रनवे को बड़ा करने की योजना पर केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाते हुए एक 20 सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है।

यह समिति रनवे विस्तार से जुड़े तकनीकी, प्रशासनिक, पर्यावरणीय और जमीन से संबंधित तमाम पहलुओं की समीक्षा करेगी।

इस कदम को पटना एयरपोर्ट के भविष्य और राजधानी की हवाई संपर्क व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रनवे की लंबाई में होगा बड़ा इजाफा

प्रस्तावित योजना के मुताबिक, पटना एयरपोर्ट के मौजूदा रनवे की लंबाई 2072.64 मीटर से बढ़ाकर 3657.6 मीटर करने की तैयारी है।

अगर यह विस्तार तय योजना के अनुसार पूरा होता है, तो पटना एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

रनवे लंबा होने से विमानों की उड़ान और लैंडिंग ज्यादा सुगम हो सकेगी, साथ ही बड़े विमानों के संचालन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

राजधानी पटना जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए यह परियोजना आने वाले वर्षों में बेहद अहम साबित हो सकती है।

केंद्र सरकार ने बनाई विशेष समिति

रनवे विस्तार के पूरे काम की निगरानी और समन्वय के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक विशेष समिति गठित की गई है।

इस समिति को परियोजना के हर पहलू पर विचार करने और संबंधित विभागों के बीच तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

समिति में विमानन, पर्यावरण, वन, प्रशासन और अन्य जरूरी क्षेत्रों से जुड़े अधिकारी शामिल किए गए हैं।

बताया जा रहा है कि यह समिति ही तय करेगी कि रनवे विस्तार की दिशा में कौन-कौन से कदम किस क्रम में उठाए जाएंगे।

चिड़ियाघर और वन विभाग के अधिकारी भी शामिल

इस समिति में केवल विमानन क्षेत्र से जुड़े अधिकारी ही नहीं, बल्कि पटना चिड़ियाघर के निदेशक और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मुख्य वन संरक्षक को भी शामिल किया गया है।

इन अधिकारियों की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि रनवे विस्तार का एक हिस्सा चिड़ियाघर की जमीन और पर्यावरणीय प्रभावों से भी जुड़ सकता है।

यानी परियोजना सिर्फ इंजीनियरिंग या निर्माण का मामला नहीं है, बल्कि इसमें वन, जैव विविधता और शहरी संतुलन जैसे पहलू भी शामिल हैं।

इसी वजह से केंद्र ने इस प्रक्रिया को बहु-आयामी तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी की है।

अप्रैल में हो सकती है पहली बैठक

जानकारी के अनुसार, इस समिति की पहली बैठक अप्रैल महीने में होने की संभावना है।

इस बैठक में रनवे विस्तार के लिए जरूरी जमीन, संभावित प्रभाव, तकनीकी बाधाएं और पर्यावरणीय पहलुओं पर प्रारंभिक चर्चा की जा सकती है।

यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहीं से परियोजना की वास्तविक रूपरेखा और आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।

संभावना है कि पहली बैठक के बाद कई विभागों को अपने-अपने स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट और सुझाव देने को कहा जा सकता है।

जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ा मुद्दा

पटना एयरपोर्ट विस्तार योजना में सबसे बड़ी चुनौती जमीन अधिग्रहण को माना जा रहा है।

रनवे को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त भूमि की जरूरत होगी, और इसके लिए कई संस्थागत व सरकारी परिसरों पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से समिति यह आकलन करेगी कि विस्तार के लिए कितनी जमीन चाहिए, वह कहां से ली जाएगी और उससे जुड़े प्रशासनिक व कानूनी पहलुओं को कैसे संभाला जाएगा।

पटना जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में भूमि से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला स्वाभाविक रूप से संवेदनशील माना जाता है।

रनवे पूरब दिशा में बढ़ाने की तैयारी

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रनवे का विस्तार पूरब दिशा की ओर किए जाने की योजना है।

बताया जा रहा है कि इस दिशा में रनवे को करीब 500 मीटर आगे ले जाने की जरूरत पड़ सकती है।

यही वह हिस्सा है, जहां आसपास की जमीन और संस्थागत परिसरों का मुद्दा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बन जाता है।

रनवे की लंबाई बढ़ाने के लिए इस पूरे हिस्से का तकनीकी और भौगोलिक मूल्यांकन किया जाएगा।

चिड़ियाघर की जमीन पर भी पड़ेगा असर

रनवे विस्तार की इस योजना का सबसे चर्चित पहलू पटना जू यानी चिड़ियाघर की जमीन से जुड़ा हुआ है।

अधिकारियों के अनुसार, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए चिड़ियाघर की लगभग 15 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ सकती है।

बताया जा रहा है कि जू के गेट नंबर-2 के पहले तक का क्षेत्र इस योजना की जद में आ सकता है।

अगर ऐसा होता है, तो समिति को यह तय करना होगा कि इस जमीन के उपयोग से चिड़ियाघर के संचालन, पशु-पक्षियों और पर्यावरणीय संरचना पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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पीरअली पथ तक असर की संभावना

अधिकारियों के मुताबिक, एयरपोर्ट की सीमा से लेकर पीरअली पथ तक और चिड़ियाघर की ओर फैले कुछ हिस्से भी विस्तार योजना से प्रभावित हो सकते हैं।

ऐसे में समिति को सिर्फ जमीन की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि यातायात, आसपास की संरचनाओं और नागरिक सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का भी अध्ययन करना होगा।

शहरी क्षेत्र में किसी बड़े बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए यह प्रक्रिया बेहद जरूरी मानी जाती है।

यही वजह है कि परियोजना को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

पर्यावरणीय असर का भी होगा आकलन

क्योंकि इस परियोजना का संबंध वन क्षेत्र, हरित क्षेत्र और चिड़ियाघर से जुड़ता है, इसलिए इसका पर्यावरणीय आकलन भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।

समिति यह देखेगी कि प्रस्तावित विस्तार से वनस्पति, जीव-जंतु, ध्वनि प्रदूषण और शहरी पारिस्थितिकी पर कितना असर पड़ सकता है।

अगर किसी प्रकार का नुकसान संभावित होता है, तो उसके विकल्प, संतुलन या प्रतिपूरक उपायों पर भी विचार किया जाएगा।

यानी रनवे विस्तार का फैसला केवल लंबाई बढ़ाने के आधार पर नहीं, बल्कि उसके समग्र प्रभाव को देखकर लिया जाएगा।

घंटाघर भी बना हुआ है चर्चा का विषय

पटना एयरपोर्ट के विस्तार और विमान संचालन से जुड़ी चर्चाओं में सचिवालय स्थित घंटाघर का मुद्दा भी फिर से सामने आया है।

पहले भी यह बात उठती रही है कि घंटाघर की ऊंचाई विमानों की लैंडिंग में तकनीकी बाधा बन सकती है।

इसी वजह से एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से इसके आकार और ऊंचाई पर पुनर्विचार की बात समय-समय पर सामने आती रही है।

अब रनवे विस्तार की प्रक्रिया के बीच यह मुद्दा फिर चर्चा में है।

लैंडिंग एंगल पर असर का दावा

सूत्रों के अनुसार, विमानों की लैंडिंग के दौरान पटना एयरपोर्ट पर मानक कोण की जगह अधिक झुकाव वाले एंगल का इस्तेमाल करना पड़ता है।

बताया जा रहा है कि जहां सामान्य तौर पर लगभग तीन डिग्री के कोण पर लैंडिंग को उपयुक्त माना जाता है, वहीं यहां कुछ स्थितियों में उससे अधिक कोण पर उतरना पड़ता है।

इसे विमानन सुरक्षा और तकनीकी संचालन के लिहाज से पूरी तरह आदर्श नहीं माना जाता।

ऐसे में रनवे विस्तार के साथ-साथ आसपास की ऊंची संरचनाओं की समीक्षा भी जरूरी हो सकती है।

घंटाघर की ऊंचाई कम करने का प्रस्ताव

बताया जा रहा है कि सचिवालय के घंटाघर की मौजूदा ऊंचाई करीब 49.5 मीटर है।

तकनीकी आकलन के आधार पर यह सुझाव सामने आया है कि इसकी ऊंचाई में करीब 17.5 मीटर तक कमी की जरूरत पड़ सकती है।

हालांकि इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है, लेकिन रनवे विस्तार और सुरक्षित लैंडिंग की व्यापक योजना में इसे भी एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखा जा रहा है।

अगर समिति इस दिशा में सहमति बनाती है, तो यह पटना शहर की संरचनात्मक पहचान से जुड़ा एक बड़ा फैसला भी हो सकता है।

पटना एयरपोर्ट के लिए क्यों जरूरी है यह विस्तार?

पटना एयरपोर्ट लंबे समय से सीमित जगह और तकनीकी चुनौतियों के बीच काम कर रहा है।

राजधानी होने के बावजूद यहां यात्री दबाव लगातार बढ़ता गया है, जबकि एयरपोर्ट का भौतिक ढांचा उसी अनुपात में विस्तृत नहीं हो पाया।

ऐसे में रनवे का विस्तार सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि पटना की भविष्य की हवाई जरूरतों से जुड़ा हुआ मामला है।

अगर रनवे बड़ा होता है, तो इससे उड़ानों की क्षमता, संचालन की सुविधा और सुरक्षा मानकों में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

समिति की भूमिका क्यों होगी अहम?

यह परियोजना कई विभागों और संस्थाओं से जुड़ी हुई है।

एक तरफ विमानन सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का सवाल है, तो दूसरी तरफ वन, पर्यावरण, चिड़ियाघर, यातायात और शहरी विकास जैसे पहलू भी हैं।

ऐसे में यह 20 सदस्यीय समिति ही वह मंच होगी, जहां इन सभी पहलुओं पर संतुलित और व्यावहारिक निर्णय लेने की कोशिश होगी।

यानी इस परियोजना का भविष्य अब काफी हद तक इसी समिति की सिफारिशों और आकलनों पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

पटना एयरपोर्ट के रनवे विस्तार को लेकर केंद्र सरकार की ओर से समिति का गठन इस दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

रनवे लंबा होने से राजधानी पटना की हवाई संपर्क क्षमता और परिचालन सुविधा में बड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन इसके साथ जमीन, पर्यावरण और शहरी संरचना से जुड़े कई जटिल सवाल भी खड़े हैं।

अब अप्रैल में होने वाली पहली बैठक पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि वहीं से इस परियोजना की रफ्तार और दिशा दोनों तय हो सकती हैं।

अगर सब कुछ योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में पटना एयरपोर्ट का स्वरूप और क्षमता—दोनों बदलते नजर आ सकते हैं।

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